दुनिया का एक मात्र पानी में तैरता "फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस", जाने ...
दुनिया का एक मात्र पानी में तैरता "फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस", जाने ...
दुनिया में आपने आज बहुत से पोस्ट ऑफिस में गए होंगे अपने लेटर या किसी और काम से। लेकिन दुनिया में एक ऐसा भी पोस्ट ऑफिस है जो पानी में है। जी हाँ, एक ऐसा पोस्ट ऑफिस जो पानी में बोट के ऊपर हमेशा तैरता है। इसलिए इसका नाम फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस रखा गया है।
कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है और कुछ लोग इसे जन्नत बोलते है । इस कश्मीर में बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो इसे अनोखा बनाती है। इन्ही कुछ चीजों में से है , ‘ फ्लोटिंग पोस्ट आफिस ‘ जो ‘ डल झील ‘ में तैरता रहता है और यहाँ पर आए सैलानियों के लिए विशेष आकर्षक है ।
दुनिया की सबसे बड़ी डाक सेवा भारत में है। भारत में 1,55,015 पोस्ट ऑफिस (डाकघर) हैं। औसतन हर एक भारतीय पोस्ट ऑफिस सात हजार से ज्यादा लोगों को सेवा देता है। लेकिन कम ही लोगों को पता होगा कि भारत में एक ऐसा पोस्ट ऑफिस भी है जो पूरी दुनिया में शायद अपनी तरह का अकेला है। धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की मशहूर डल झील में स्थित इस “फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस” में वो सारे कामकाज होते हैं जो दूसरे सामान्य पोस्ट ऑफिस में होते हैं। हालांकि इस पोस्ट ऑफिस में कुछ चीजें दूसरे डाकघरों से अलग भी हैं। मसलन, इस डाकखाने की मुहर पर तारीख और पते के साथ शिकारी खे रहे नाविक की तस्वीर बनी होती है। ये पोस्ट है तो अंग्रजों के जमाने का लेकिन इसे नया नाम (फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस) साल 2011 में मिला।
floating post office India
पहले इस पोस्ट ऑफिस का नाम “नेहरू पार्क पोस्ट ऑफिस” था। लेकिन 2011 में तत्कालीन चीफ पोस्ट मास्टर जान सैम्युअल ने इसका नाम “फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस” रखवाया। अगस्त, 2011 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और तत्कालीन केंद्रीय संचार और आईटी मंत्री सचिन पायलट ने इसका उद्घाटन किया। ये पोस्ट ऑफिस जिस हाउसबोट में है उसमें दो कमरे हैं। एक कमरा पोस्ट ऑफिस के तौर पर काम करता है और दूसरा कमरा संग्रहालय के तौर पर। संग्रहालय में भारतीय डाक के इतिहास से जुड़ी सामग्री प्रदर्शन के लिए रखी गई है।
आप ये न समझिएगा कि ये “तैरता डाकघर” केवल सजावट की चीज है। डल झील के हाउसबोट में रुकने वाले सैलानी और वहां घूमने वाले पर्यटक अपने मित्रों-परिजनों को डाक भेजने के लिए इस्तेमाल करते हैं। स्थानीय नागरिक इस डाकघर की बचत योजनाओं का भी लाभ उठाते हैं और अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई इसमें जमा करते हैं। डल झील इलाके में करीब 50 हजार लोग रहते होंगे।
आम तौर पर इस पोस्ट ऑफिस को कामकाज में कोई दिक्कत नहीं आती लेकिन साल 2014 में आई बाढ़ में ये पोस्ट ऑफिस भी संकट में घिर गया था। राहत एवं बचाव दल के जवानों ने इस पोस्ट ऑफिस को बाढ़ के दौरान एक जगह अंकुश लगाकर बांधना पड़ा था। जब बाढ़ थम गई तो इसे दोबारा डल झील में वापस लाया गया।
दुनिया में आपने आज बहुत से पोस्ट ऑफिस में गए होंगे अपने लेटर या किसी और काम से। लेकिन दुनिया में एक ऐसा भी पोस्ट ऑफिस है जो पानी में है। जी हाँ, एक ऐसा पोस्ट ऑफिस जो पानी में बोट के ऊपर हमेशा तैरता है। इसलिए इसका नाम फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस रखा गया है।
कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है और कुछ लोग इसे जन्नत बोलते है । इस कश्मीर में बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो इसे अनोखा बनाती है। इन्ही कुछ चीजों में से है , ‘ फ्लोटिंग पोस्ट आफिस ‘ जो ‘ डल झील ‘ में तैरता रहता है और यहाँ पर आए सैलानियों के लिए विशेष आकर्षक है ।
दुनिया की सबसे बड़ी डाक सेवा भारत में है। भारत में 1,55,015 पोस्ट ऑफिस (डाकघर) हैं। औसतन हर एक भारतीय पोस्ट ऑफिस सात हजार से ज्यादा लोगों को सेवा देता है। लेकिन कम ही लोगों को पता होगा कि भारत में एक ऐसा पोस्ट ऑफिस भी है जो पूरी दुनिया में शायद अपनी तरह का अकेला है। धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की मशहूर डल झील में स्थित इस “फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस” में वो सारे कामकाज होते हैं जो दूसरे सामान्य पोस्ट ऑफिस में होते हैं। हालांकि इस पोस्ट ऑफिस में कुछ चीजें दूसरे डाकघरों से अलग भी हैं। मसलन, इस डाकखाने की मुहर पर तारीख और पते के साथ शिकारी खे रहे नाविक की तस्वीर बनी होती है। ये पोस्ट है तो अंग्रजों के जमाने का लेकिन इसे नया नाम (फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस) साल 2011 में मिला।
floating post office India
पहले इस पोस्ट ऑफिस का नाम “नेहरू पार्क पोस्ट ऑफिस” था। लेकिन 2011 में तत्कालीन चीफ पोस्ट मास्टर जान सैम्युअल ने इसका नाम “फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस” रखवाया। अगस्त, 2011 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और तत्कालीन केंद्रीय संचार और आईटी मंत्री सचिन पायलट ने इसका उद्घाटन किया। ये पोस्ट ऑफिस जिस हाउसबोट में है उसमें दो कमरे हैं। एक कमरा पोस्ट ऑफिस के तौर पर काम करता है और दूसरा कमरा संग्रहालय के तौर पर। संग्रहालय में भारतीय डाक के इतिहास से जुड़ी सामग्री प्रदर्शन के लिए रखी गई है।
आप ये न समझिएगा कि ये “तैरता डाकघर” केवल सजावट की चीज है। डल झील के हाउसबोट में रुकने वाले सैलानी और वहां घूमने वाले पर्यटक अपने मित्रों-परिजनों को डाक भेजने के लिए इस्तेमाल करते हैं। स्थानीय नागरिक इस डाकघर की बचत योजनाओं का भी लाभ उठाते हैं और अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई इसमें जमा करते हैं। डल झील इलाके में करीब 50 हजार लोग रहते होंगे।
आम तौर पर इस पोस्ट ऑफिस को कामकाज में कोई दिक्कत नहीं आती लेकिन साल 2014 में आई बाढ़ में ये पोस्ट ऑफिस भी संकट में घिर गया था। राहत एवं बचाव दल के जवानों ने इस पोस्ट ऑफिस को बाढ़ के दौरान एक जगह अंकुश लगाकर बांधना पड़ा था। जब बाढ़ थम गई तो इसे दोबारा डल झील में वापस लाया गया।


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