लोगो का महिलाओं के बारे में सोच


                         लोगो का महिलाओं के बारे में सोच




* अरे ! तुमने ब्रा ऐसे ही खुले में सूखने को डाल दी ?’ तौलिये से ढंको इसे ! ऐसा एक मां अपनी 13-14 साल की बेटी को उलाहने के अंदाज में कहती है।

* ‘तुम्हारी ब्रा का स्ट्रैप दिख रहा है’, कहते हुए एक लड़की अपनी सहेली के कुर्ते को आगे खींचकर ब्रा का स्ट्रैप ढंक देती है।

* ‘सुनो! किसी को बताना मत कि तुम्हें पीरियड्स शुरू हो गए हैं।’‘ ढंग से दुपट्टा लो, इसे गले में क्यों लपेट रखा है?
* ’‘लड़की की फोटो साड़ी में भेजिएगा।‘‘हमें अपने बेटे के लिए सुशील, गोरी, खूबसूरत, पढ़ी-लिखी, घरेलू लड़की चाहिए।
* ‘‘नकद कितना देंगे ? बारातियों के स्वागत में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।‘‘
* दिन भर घर में रहती हो। काम क्या करती हो तुम ? बाहर जाकर कमाना पड़े तो पता चले।‘‘
* मैं नौकरी कर रहा हूं ना, तुम्हें बाहर खटने की क्या जरूरत? अच्छा, चलो ठीक है, घर में ब्यूटी पार्लर खोल लेना।

* ‘‘बाहर काम करने का यह मतलब तो नहीं कि तुम घर की जिम्मेदारियां भूल जाओ।
औरत होने का मतलब समझती हो तुम?
’‘जी, मैं अंकिता मिश्रा हूं। शादी से पहले अंकिता त्रिपाठी थी। यह है मेरा बेटा रजत मिश्रा।


* ‘‘तुम थकी हुई हो तो मैं क्या करूं? मैं सेक्स नहीं करूंगा क्या?

* ’‘कैसी बीवी हो तुम? अपने पति को खुश नहीं कर पा रही हो? बिस्तर में भी मेरी ही चलेगी।

* ’‘तुम्हें ब्लीडिंग क्यों नहीं हुई? वरजिन नहीं हो तुम?’

* ‘तुम बिस्तर में इतनी कंफर्टेबल कैसे हो? इससे पहले कितनों के साथ सोई हो?


* ’‘तुम क्यों प्रपोज करोगी उसे? लड़का है उसे फर्स्ट मूव लेने दो। तुम पहल करोगी तो तुम्हारी इमेज खराब होगी।




* ‘‘नहीं-नहीं, लड़की की तो शादी करनी है। हां, पढ़ाई में अच्छी है तो क्या करें, शादी के लिए पैसे जुटाना ज्यादा जरूरी है।

* ‘‘इतनी रात को बॉयफ्रेंड के साथ घूमेगी तो रेप नहीं होगा क्या ?
* ‘‘इतनी छोटी ड्रेस पहनेगी तो रेप नहीं होगा।
* ‘‘सिगरेट-शराब सब पीती है, समझ ही गए होंगे कैसी लड़की है।
* ‘‘पहले जल्दी शादी हो जाती थी, इसलिए रेप नहीं होते थे।
* ‘‘लड़के हैं, गलती हो जाती है।
* ‘‘फेमिनिजम के नाम पर अश्लीलता फैला रखी है।
* 10 लोगों के साथ सेक्स करना और बिकीनी पहनना ही महिला सशक्तीकरण है क्या?
* ‘‘मेट्रो में अगल कोच मिल तो गया भई! अब कितना सशक्तीकरण चाहिए?

- बस करो लंबी लिस्ट हो गई ना? इरिटेट हो रहे हैं आप। सच कहूं तो मैं भी इरिटेट हो चुकी हूं यह सुनकर कि मैं ‘देश की बेटी’, ‘घर की इज्जत’, ‘मां’और ‘देवी’ हूं।
नहीं हूं मैं ये सब।
मैं इंसान हूं आपकी तरह।
मेरे शरीर के कुछ अंग आपसे अलग हैं इसलिए मैं औरत हूं।

* बस, इससे ज्यादा और कुछ नहीं।
* सैनिटरी नैपकिन देखकर शर्म आती है आपको? इतने शर्मीले होते आप तो इतने यौन हमले क्यों होते हम पर?
* ओह! ब्रा और पैंटी देखकर भी शर्मा जाते हैं आप या इन्हें देखकर आपकी सेक्शुअल डिजायर्स जग जाती हैं, * आप बेकाबू हो जाते हैं और रेप कर देते हैं।
* अच्छा, मेरी टांगें देखकर आप बेकाबू हो गए।
* आप उस बच्ची के नन्हे-नन्हे पैर देखकर भी बेकाबू हो गए।
* उस बुजुर्ग महिला के लड़खड़ाकर चलते हुए पैरों ने भी आपको बेकाबू कर दिया।
* अब इसमें भला आपकी क्या गलती!
* कोई ऐसे अंग-प्रदर्शन करेगा तो आपका बेकाबू होना लाजमी है।

* यह बात और है कि आपको बनियान और लुंगी में घूमते देख महिलाएं बेकाबू नहीं होतीं।
* लेकिन आप तो कह रहे थे कि स्त्री की कामेच्छा किसी से तृप्त ही नहीं हो सकती? वैसे कामेच्छा होने में और * अपनी कामेच्छा को किसी पर जबरन थोपने में अंतर तो समझते होंगे आप ?

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